हृदय शूल या दिल के दर्द का होम्योपैथिक इलाज [ Homeopathic Medicine For Angina Pectoris, Chest Pain ]

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हृदय को चारों ओर से लपेटकर उसका पोषण करने वाली धमनियां “कोरोनरी आर्टरीज” कहलाती हैं। इनमें रक्त के रुक जाने से हृदय पर दबाव पड़ता है और दर्द होता है और इतना तेज दर्द होता है कि मृत्यु सामने खड़ी दिखाई देने लगती है। शरीर का रंग राख की तरह फीका पड़ जाता है, शरीर पसीने से तर-बतर हो जाता है और दर्द बाएं कंधे तथा बाएं हाथ में छोटी उंगली तक फैल जाता है। ऐसा दर्द स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में अधिक होता है। इस रोग की मुख्य औषधियां निम्नलिखित हैं —

कार्बावेज 6, 30 — यदि पेट में बहुत अधिक वायु के कारण छाती पर दबाव पड़ने से हृदय में दर्द का अनुभव हो, तो इस औषधि की एक मात्रा भोजन से आधा घंटा पहले देने से बहुत लाभ होता है।

कैटेगस (मूल-अर्क) — हृदय के सब रोगों के लिए यह सर्व-प्रधान औषधि है। बाएं हाथ में असह्य दर्द होने के हृदय-शूल में इस औषधि के मूल-अर्क (मदर-टिंक्चर) को पानी के साथ 5 बूंद आठ-आठ घंटे के अंतर से देनी चाहिए।

लैट्रोडेक्टस 6 — छाती में हृदय-प्रदेश का दर्द, दर्द की गति कंधों तथा पीठ की तरफ होती है। पुराने हृदय-शूल में इसका प्रयोग किया जाता है।

एमिल नाइट्रेट 3 — यदि किसी प्रकार भी यह दर्द ठीक होता न दिखे, तो रुई में इसकी 3-4 बूंद सुंघाने से हृदय का दर्द शांत हो जाता है।

आर्सेनिक 30 — यदि हृदय-शूल केवल स्नायविक हो, तो यह एक मुख्य औषधि है। यदि हृदय की पेशियों ही में तबदीली आ गई हो, तब उसकी कोई चिकित्सा नहीं है, केवल कष्ट का शमन करने का ही उपाय किया जा सकता है। यदि केवल हृदय में दर्द उठा है, तब इस औषधि के अतिरिक्त अन्य किसी औषधि पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

जेलसिमियम 30 तथा बेलाडोना 30 — यदि हृदय की रचना में ही अंतर आ जाए, तो ये दोनों औषधियां रोगी के कष्ट को तत्काल दूर कर सकती हैं।

टैबेकम 30, 200 — हृदय-रोग में प्रायः इस औषधि से लाभ होता है। रोगी को बाईं तरफ लेटने से धड़कन का अनुभव होता है; छाती में दर्द होता है। यह दर्द छाती के मध्य-स्थल से चारों तरफ फैलता है। कभी-कभी बहुत अधिक शारीरिक परिश्रम करने से ऐसा हो जाता है।

ग्लोनॉयन 30 — तीव्र धड़कन मानो हृदय छाती को फाड़कर बाहर आ जाएगा। दम-सा घुटना, दर्द छाती में चारों ओर फैल जाता है, अर्थात बाईं बांह के नीचे की तरफ जाता है।

स्पाइजेलिया 6, 30 — अल्कोहल अथवा तंबाकू आदि के अधिक सेवन से हृदय पर बोझ-सा महसूस करना, हृदय में काटने जैसा तेज दर्द होना।

लैट्रोडैक्टस 12x — हृदय-शूल के लिए यह अत्यंत उपयोगी औषधि है। विशेषतः हृदय के दौरे के बाद ठीक हो जाने पर भी जिन्हें कभी-कभी हृदय में दर्द हो जाया करता है और यह संदेह हो जाता है कि रोग का पुनः आक्रमण न हो जाए, ऐसे रोगियों को 12x शक्ति में यह औषधि दिन में 2-3 बार देते रहने से फिर दिल का दौरा नहीं पड़ता।

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