जोड़ों में स्राव भर जाने का होम्योपैथिक इलाज [ Homeopathic Medicine For Joint Effusion ]

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हिपर सल्फर 6 — यदि रोगाक्रांत जोड़ पक जाएं, तब इसका प्रयोग करें।

साइलीशिया 6 — यदि रोगग्रस्त जोड़ के पक जाने पर उससे मवाद निकलने लगे, तब यह औषधि दें और एक कप पानी में 15 बूंद औषधि डालकर और उसमें पट्टी भिगोकर जोड़ पर रखें।

ब्रायोनिया 30 — यदि जोड़ों में हर तरह की हरकत से पीड़ा बढ़े, रोगाक्रांत स्थान को छुआ न जा सके, तब दें।

एकोनाइट 6, 30 — यदि वात-व्याधि से ग्रस्त रोगियों के घुटने आदि के जोड़ों में स्राव भर जाए, ज्वर हो, बेचैनी और पीड़ा हो, साथ ही दर्द भी हो, तब इस औषधि का प्रयोग करें।

पल्सेटिला 30 — यदि स्त्रियों तथा बच्चों के इस कष्ट में गरम सेक से कष्ट बढ़े, तब यह दें।

बारबेरिस 1x — यदि घुटनों के जोड़ों में स्राव भर जाए, तब यह औषधि बहुत उपयोगी है।

आयोडाइड 3x — यदि जोड़ों में स्राव भर कर वे फूल जाएं, तब इस औषधि का प्रयोग करें।

बेन्जोइक एसिड 6 — दायां घुटना स्राव से रोगाक्रांत हो जाने पर इससे बहुत लाभ होता है।

कैलि आयोडाइड (विचूर्ण) — यदि उपदंश के कारण जोड़ों में स्राव भर गया हो, तब दें, यह औषधि उपदंश (सिफिलिस) रोग में दी जाती है। उपदंश का रोग पारे की औषधियों से दबा दिए जाने पर गठिया भी हो सकता है। ऐसी अवस्था में गठिया में यह औषधि उपयोगी है।

मर्क सौल 30 — यदि रोगी वात-व्याधि से ग्रस्त हो, जोड़ों में स्राव हो, तब यह उपयोगी है।

बैसीलीनम 30, 200 — जोड़ों में स्राव के रोगियों को सप्ताह में एक बार यह औषधि दें।

कैल्केरिया फॉस 3 — यदि यक्ष्मा-प्रकृति के रोगी के टांसिले बढ़े हुए हों और जोड़ों में स्राव भरा हुआ हो, तब इस औषधि का प्रयोग करने से रोगी को बहुत लाभ होता है।

कैल्केरिया कार्ब 30 — भारी, मोटे और थुलथुल शरीर के व्यक्तियों को, जिन्हें सर्दी सताती हो, सिर पर पसीना आता हो, शरीर से खड़ी बू-सी आए, तब यह औषधि देना उपयोगी है।

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